छत्तीसगढ़ में पान की खेती का पुनरुद्धार: 47 किस्मों पर शोध जारी

कृषि
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News18•28-01-2026, 10:24
छत्तीसगढ़ में पान की खेती का पुनरुद्धार: 47 किस्मों पर शोध जारी
- •खैरागढ़-छुईखदान-गंडई और डोंगरगढ़ में प्रचलित पान की खेती पिछले 50 वर्षों में मौसम परिवर्तन, तकनीकी ज्ञान की कमी और बाजार की अनिश्चितताओं के कारण घट गई थी.
- •छत्तीसगढ़ सरकार ने पान की खेती को पुनर्जीवित करने और किसानों को वैज्ञानिक तरीकों से प्रशिक्षित करने के लिए पिछले साल छुईखदान में पान अनुसंधान केंद्र स्थापित किया, जिसके प्रभारी डॉ. भगवत सरन असारती हैं.
- •केंद्र चौरसिया और महोबिया समुदायों के लोगों को इकट्ठा कर प्रशिक्षित कर रहा है, जो पारंपरिक रूप से पान की खेती करते थे, और किसानों को आधुनिक तकनीक सीखने के लिए अध्ययन यात्राओं पर भेज रहा है.
- •वर्तमान में, छुईखदान में 10 बरेजा (शेड) के तहत पान की खेती फिर से स्थापित की गई है, जिसमें बिलहोरी पान, बांग्ला पान, मीठा पान, कपूरी पान और देसी पान जैसी प्रमुख किस्में प्रदर्शित की जा रही हैं.
- •पश्चिम बंगाल, ओडिशा और मध्य प्रदेश से प्राप्त 47 प्रकार के पान के पत्तों पर शोध चल रहा है ताकि विशिष्ट गुणों और उपयोगों के लिए सबसे उपयुक्त किस्मों की पहचान की जा सके, इसमें महिला समूहों को भी आर्थिक सशक्तिकरण के लिए शामिल किया जा रहा है.
यह क्यों महत्वपूर्ण है?: छत्तीसगढ़ अनुसंधान, प्रशिक्षण और सामुदायिक भागीदारी के माध्यम से अपनी पारंपरिक पान की खेती को पुनर्जीवित कर रहा है.
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