पूर्णिया वृद्धाश्रम में रह रहे आर के दास की कहानी, बच्चों की बेरुखी का कड़वा सच
पूर्णिया
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News1808-01-2026, 14:21

शिक्षित बेटों ने छोड़ा बेसहारा, पूर्णिया वृद्धाश्रम में 'बागबान' की दर्दनाक कहानी.

  • सेवानिवृत्त रेलवे कर्मचारी आर.के. दास, जिनके चार शिक्षित बेटे हैं, पिछले दो साल से पूर्णिया के वृद्धाश्रम में रह रहे हैं.
  • बच्चों को इंजीनियर और शिक्षक बनाने के बावजूद, सेवानिवृत्ति के बाद उन्हें घर में मारपीट और जेल का सामना करना पड़ा.
  • वे आज भी अपनी पेंशन का हिस्सा पोते-पोतियों की शिक्षा के लिए भेजते हैं, लेकिन कोई उनसे मिलने या फोन करने नहीं आता.
  • वृद्धाश्रम के समन्वयक ने पुष्टि की कि परिवार का कोई सदस्य उनसे मिलने नहीं आया, जो समाज की गिरती नैतिकता को दर्शाता है.
  • समाजसेवी रंजीत कुमार ने युवाओं में शिक्षा के साथ संस्कारों की आवश्यकता पर जोर दिया, ताकि ऐसी घटनाएं न हों.

यह क्यों महत्वपूर्ण है?: पूर्णिया में शिक्षित बेटों द्वारा पिता का परित्याग समाज में गिरते पारिवारिक मूल्यों का दुखद उदाहरण है.

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