नीतीश कुमार ने वर्ष 1997 में ही लोकतंत्र में लोकलाज की बात पर जबरदस्त संबोधन दिया था.
पटना
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News1807-01-2026, 13:58

नीतीश कुमार का 1997 का 'पद छोड़ो, अदालत जाओ' भाषण आज भी प्रासंगिक.

  • नीतीश कुमार का 30 अप्रैल 1997 का लोकसभा भाषण, जिसमें नैतिकता और जवाबदेही पर जोर दिया गया था, 28 साल बाद फिर चर्चा में है.
  • रेलवे बजट पर बहस के दौरान दिए गए इस भाषण में उन्होंने गंभीर आरोपों का सामना कर रहे नेताओं से इस्तीफा देकर अदालत में अपनी बेगुनाही साबित करने का आह्वान किया था, जो सीधे लालू प्रसाद यादव के चारा घोटाले से जुड़ा था.
  • कुमार ने "दोहरे मापदंडों" की आलोचना की, हवाला घोटाले में शरद यादव, माधवराव सिंधिया, वी.सी. शुक्ला और लाल कृष्ण आडवाणी जैसे नेताओं के इस्तीफे का उदाहरण दिया.
  • लालू यादव के चारा घोटाले में दोषी ठहराए जाने और लालू व तेजस्वी यादव के IRCTC घोटाले में आगामी अदालती पेशी के कारण यह भाषण फिर से वायरल हो रहा है.
  • बदलते राजनीतिक समीकरणों के बावजूद, सत्ता, नैतिकता और लोकतंत्र पर भाषण का मूल संदेश आज भी बिहार की राजनीति में अत्यधिक प्रासंगिक है.

यह क्यों महत्वपूर्ण है?: नीतीश कुमार का 1997 का राजनीतिक नैतिकता पर भाषण आज भी बेहद प्रासंगिक है.

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