15वें वित्त आयोग ने मौजूदा महानगरों पर जनसंख्या के बढ़ते दबाव को कम करने के लिए नए शहरों की अवधारणा पेश की थी.
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News1801-02-2026, 08:25

₹8,000 करोड़ धूल फांक रहे, 8 नए शहरों का सपना 'हवा' हुआ

  • देश में 8 नए शहर बनाने के लिए 15वें वित्त आयोग द्वारा आवंटित ₹8,000 करोड़ पिछले पांच सालों से सरकारी खजाने में पड़े हैं.
  • नियोजित शहरीकरण और आधुनिक बुनियादी ढांचे को बढ़ावा देने का यह महत्वाकांक्षी सपना साकार नहीं हो पाया है.
  • जटिल मूल्यांकन प्रक्रिया और नौकरशाही की सुस्ती के कारण 23 राज्यों से मिले 28 प्रस्तावों में से एक भी शहर का नाम तय नहीं हो पाया है.
  • सरकार की रणनीति अब नए शहर बनाने के बजाय मौजूदा शहरों के सुधार पर केंद्रित हो रही है, 'नया रायपुर' जैसे उदाहरणों से सीख लेते हुए.
  • वायु प्रदूषण नियंत्रण और सार्वजनिक परिवहन जैसी अन्य महत्वपूर्ण योजनाएं भी निराशाजनक प्रगति दिखा रही हैं.

यह क्यों महत्वपूर्ण है?: नए शहरों के लिए ₹8,000 करोड़ अप्रयुक्त पड़े हैं, जो शहरी विकास और नीति कार्यान्वयन में बड़ी विफलताओं को उजागर करता है.

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