HMT घड़ी: देश की धड़कन से गुमनामी तक का सफर, कहां हुई चूक?

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News18•24-01-2026, 08:54
HMT घड़ी: देश की धड़कन से गुमनामी तक का सफर, कहां हुई चूक?
- •1960 से 1990 के दशक तक HMT घड़ियां भारतीय घरों का अभिन्न अंग और प्रतिष्ठा का प्रतीक थीं, जिन्हें 'राष्ट्र की टाइमकीपर' कहा जाता था.
- •1953 में हिंदुस्तान मशीन टूल्स के रूप में स्थापित, कंपनी ने 1961 में जापान की सिटिजन के साथ मिलकर बेंगलुरु में भारत की पहली घड़ी फैक्ट्री स्थापित की.
- •HMT 1980 के दशक के अंत में अधिक सटीक और सस्ती क्वार्ट्ज तकनीक की ओर वैश्विक बदलाव को अपनाने में विफल रही, यांत्रिक घड़ियों पर ध्यान केंद्रित रखा.
- •1987 में टाइटन का आगमन, जिसने फैशन, मार्केटिंग और क्वार्ट्ज तकनीक पर ध्यान केंद्रित किया, साथ ही HMT की PSU संबंधी लालफीताशाही और अति आत्मविश्वास ने इसके पतन का कारण बना.
- •भारी नुकसान और पुराने डिजाइनों का सामना करते हुए, भारत सरकार ने 2016 में HMT वॉच डिवीजन और HMT चिनार वॉचेस को बंद कर दिया, हालांकि 2019 में उत्साही लोगों के लिए सीमित उत्पादन फिर से शुरू हुआ.
यह क्यों महत्वपूर्ण है?: HMT का पतन नवाचार और बदलती उपभोक्ता प्राथमिकताओं के अनुकूल होने की महत्वपूर्ण आवश्यकता को दर्शाता है.
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