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Moneycontrol20-01-2026, 15:01

40 के बाद खरीदें या किराए पर लें? स्कूल फीस और बुजुर्ग माता-पिता बदलते हैं घर का गणित

  • मध्य-करियर वाले परिवारों (40+) के लिए खरीदने या किराए पर लेने का निर्णय अब वैचारिक नहीं, बल्कि स्कूल फीस और बुजुर्ग माता-पिता के कारण अत्यधिक व्यावहारिक है.
  • स्कूल फीस कठोर, बढ़ती और गैर-परक्राम्य होती हैं, जिससे भविष्य की शिक्षा लागतों के साथ एक लंबी ईएमआई एक महत्वपूर्ण वित्तीय बोझ बन जाती है.
  • बुजुर्ग माता-पिता अनियमित, भावनात्मक रूप से चार्ज और तत्काल चिकित्सा लागतें लाते हैं, जिसके लिए तरलता की आवश्यकता होती है जिसे घर खरीदना प्रतिबंधित कर सकता है.
  • किराए पर लेना बदलती वित्तीय जरूरतों, जैसे फीस में वृद्धि या चिकित्सा आपात स्थिति, को संपत्ति लेनदेन के घर्षण के बिना अनुकूलित करने की सुविधा प्रदान करता है.
  • खरीदना तब समझ में आ सकता है जब ईएमआई कम आय वाले वर्षों में भी वहनीय हो, शिक्षा और चिकित्सा लक्ष्यों के लिए धन हो, और स्थान के प्रति दीर्घकालिक प्रतिबद्धता हो.

यह क्यों महत्वपूर्ण है?: मध्य-करियर वाले व्यक्तियों के लिए, आवास निर्णयों में स्वामित्व के बजाय वित्तीय लचीलेपन को प्राथमिकता देनी चाहिए.

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