Under the current rules, the entire pre-issue capital held by persons other than promoters; except for certain specified shareholders—must be locked-in for six months from the date of allotment in an IPO. However, depositories are currently unable to mark pledged shares as locked-in, creating compliance challenges for issuers preparing to list.
बिज़नेस
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Moneycontrol17-12-2025, 18:18

SEBI ने IPO लॉक-इन नियमों, प्रकटीकरण ढांचे में किए बड़े बदलाव.

  • SEBI ने IPO लॉक-इन नियमों और प्रकटीकरण ढांचे में बदलावों को मंजूरी दी, जिससे परिचालन संबंधी कठिनाइयाँ दूर होंगी.
  • एक नई तकनीक-आधारित प्रणाली गिरवी रखे गए प्री-इश्यू शेयरों को स्वचालित रूप से लॉक-इन करेगी, जिससे अनुपालन आसान होगा.
  • ICDR प्रावधानों को संशोधित किया गया है, जिससे डिपॉजिटरी को सीधे गिरवी शेयरों का प्रबंधन करने का अधिकार मिलेगा.
  • कंपनियों को अपने आर्टिकल्स ऑफ एसोसिएशन (AoA) में संशोधन करना होगा ताकि गिरवी रखे गए शेयर लॉक-इन रहें.
  • निवेशकों के लिए महत्वपूर्ण जानकारी तक आसान पहुँच हेतु DRHP चरण में QR कोड के साथ एक संक्षिप्त प्रॉस्पेक्टस उपलब्ध होगा.

यह क्यों महत्वपूर्ण है?: SEBI के सुधारों से IPO अनुपालन सरल होगा और निवेशकों के लिए पारदर्शिता बढ़ेगी.

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