States including Madhya Pradesh, Bihar, Assam and West Bengal have recently signed power purchase agreements (PPAs) for coal-fired electricity at tariffs as high as Rs 6.64 per unit, despite renewable energy being available in the Rs 2.5-4 per unit range.
बिज़नेस
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Moneycontrol26-12-2025, 08:30

राज्य सस्ते हरित ऊर्जा को छोड़कर महंगे कोयला सौदों में फंस रहे हैं: रिपोर्ट.

  • भारतीय राज्य सस्ते नवीकरणीय ऊर्जा (₹2.5-4/यूनिट) की उपलब्धता के बावजूद, उच्च टैरिफ (₹6.64/यूनिट तक) पर दीर्घकालिक कोयला बिजली अनुबंध कर रहे हैं.
  • डिस्कॉम नवीकरणीय ऊर्जा की रुक-रुक कर उपलब्धता, बैटरी आपूर्ति श्रृंखला की चिंताओं और 24x7 बेसलोड बिजली की आवश्यकता को कोयले को प्राथमिकता देने का कारण बताते हैं.
  • मध्य प्रदेश, बिहार, असम, पश्चिम बंगाल और उत्तर प्रदेश जैसे प्रमुख राज्यों ने हाल ही में महत्वपूर्ण कोयला-आधारित बिजली खरीद समझौते किए हैं.
  • यह प्रवृत्ति तब हो रही है जब 43GW नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता बिना पीपीए के फंसी हुई है और भारत 2032 तक लगभग 100GW नई कोयला-आधारित क्षमता जोड़ने की योजना बना रहा है.
  • विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि दीर्घकालिक कोयला पीपीए भारत के डीकार्बोनाइजेशन लक्ष्यों को कमजोर कर सकते हैं, डिस्कॉम को महंगी बिजली में फंसा सकते हैं और नवीकरणीय खरीद दायित्वों में बाधा डाल सकते हैं.

यह क्यों महत्वपूर्ण है?: राज्य विश्वसनीयता के लिए कोयले को प्राथमिकता दे रहे हैं, जिससे लागत बढ़ सकती है और हरित ऊर्जा संक्रमण बाधित हो सकता है.

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