बच्चों को तड़के जगाने की साजिश: औद्योगिक क्रांति की देन, सीखने की क्षमता पर असर.

शिक्षा
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News18•09-01-2026, 16:53
बच्चों को तड़के जगाने की साजिश: औद्योगिक क्रांति की देन, सीखने की क्षमता पर असर.
- •ऐतिहासिक रूप से, स्कूल के शुरुआती समय औद्योगिक क्रांति और माता-पिता के काम के कार्यक्रम से प्रेरित थे, न कि बच्चों की सीखने की ज़रूरतों से.
- •1900 के दशक की शुरुआत में लागत बचाने के लिए शुरू की गई 'टियरर्ड बसिंग' प्रणाली ने हाई स्कूल के शुरुआती समय को सुबह 7 बजे तक धकेल दिया.
- •विज्ञान बताता है कि किशोरों की सर्कैडियन लय बदल जाती है, जिससे सुबह जल्दी उठना मुश्किल हो जाता है और उनकी सीखने की क्षमता 20% तक प्रभावित होती है.
- •किशोरों के लिए सुबह जल्दी स्कूल शुरू होना 'सोशल जेट लैग' जैसा है, जो उनके मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य पर नकारात्मक प्रभाव डालता है.
- •कैलिफ़ोर्निया और यूरोप के कुछ हिस्सों जैसे कुछ क्षेत्रों में अब स्कूल शुरू होने का समय 8:30 बजे या उसके बाद निर्धारित किया जा रहा है, जिससे छात्रों के ग्रेड, उपस्थिति में सुधार और अवसाद में कमी आई है.
यह क्यों महत्वपूर्ण है?: जल्दी स्कूल शुरू होना एक पुरानी व्यवस्था है जो बच्चों के स्वास्थ्य और सीखने को प्रभावित करती है; देर से शुरू होने से महत्वपूर्ण लाभ होते हैं.
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