घी नहीं अमृत है ये 
धर्म
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News1824-01-2026, 18:44

बाबा बागनाथ मंदिर का 'घी गुफा' प्रसाद: रोगों का रामबाण इलाज और दिव्य ऊर्जा

  • उत्तराखंड के बागेश्वर में बाबा बागनाथ मंदिर में मकर संक्रांति के बाद शिवलिंग पर शुद्ध देसी घी चढ़ाया जाता है, जिसे 'घी गुफा' या 'घृत कमल' कहते हैं.
  • मंदिर के पुजारी हेम चंद्र पाठक बताते हैं कि यह परंपरा भगवान शिव को शीत निद्रा और गहन तपस्या के दौरान ठंड से बचाने के लिए है.
  • यह घी एक महीने तक शिवलिंग पर रहता है, दिव्य ऊर्जा को अवशोषित करता है, और फिर भक्तों को प्रसाद के रूप में वितरित किया जाता है.
  • यह विशेष प्रसाद खाने या दीपक जलाने के लिए नहीं है; यह शरीर पर बाहरी अनुप्रयोग के लिए है.
  • माना जाता है कि यह खुजली, दाद, फोड़े-फुंसी और अन्य त्वचा रोगों के साथ-साथ सिरदर्द और माइग्रेन के लिए भी रामबाण है.

यह क्यों महत्वपूर्ण है?: बाबा बागनाथ मंदिर की 'घी गुफा' धार्मिक परंपरा और औषधीय लाभों का एक अनूठा संगम प्रस्तुत करती है.

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