महाभारत युद्ध में पितामह भीष्म बाणों की शैया पर लेटे रहे.
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News1824-01-2026, 13:06

भीष्म अष्टमी 2026: बाणों की शैया पर 2 महीने क्यों रुके भीष्म? जानें इच्छा मृत्यु का रहस्य.

  • महाभारत के प्रभावशाली पात्र गंगापुत्र भीष्म ने हस्तिनापुर के सिंहासन की रक्षा के लिए कौरवों की ओर से युद्ध किया.
  • युद्ध के 10वें दिन अर्जुन के बाणों से बिंधने के बाद भी भीष्म तुरंत नहीं मरे, बल्कि बाणों की शैया पर लेटे रहे.
  • भीष्म को इच्छा मृत्यु का वरदान प्राप्त था, जिससे वे अपनी इच्छानुसार प्राण त्याग सकते थे.
  • उन्होंने दो महीने तक सूर्य के उत्तरायण में आने का इंतजार किया, क्योंकि दक्षिणायन में मृत्यु मोक्ष नहीं देती.
  • पिता शांतनु ने भीष्म को इच्छा मृत्यु का वरदान उनकी प्रतिज्ञा के कारण दिया था, जिसमें उन्होंने आजीवन ब्रह्मचर्य का संकल्प लिया था.

यह क्यों महत्वपूर्ण है?: भीष्म ने मोक्ष प्राप्ति के लिए बाणों की शैया पर 2 महीने तक मृत्यु का इंतजार किया, जो इच्छा मृत्यु के वरदान से संभव हुआ.

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