भगवनदास रायकवार को पद्मश्री: बुंदेली युद्ध कला बचाने वाले 'दाऊ' का सम्मान
सागर
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News1825-01-2026, 21:26

भगवनदास रायकवार को पद्मश्री: बुंदेली युद्ध कला बचाने वाले 'दाऊ' का सम्मान

  • सागर के 83 वर्षीय भगवनदास रायकवार, जिन्हें 'दाऊ' के नाम से जाना जाता है, को बुंदेली युद्ध कला को संरक्षित करने के लिए पद्मश्री से सम्मानित किया गया है.
  • उन्होंने इस लुप्त होती कला को बचाने के लिए 1998 में अपनी सरकारी बैंक की नौकरी छोड़ दी और खुद को पूरी तरह से इसके शिक्षण के लिए समर्पित कर दिया.
  • रायकवार ने सागर के रामपुरा वार्ड में छत्रसाल अखाड़े में यह कला सीखी और तब से 10,000 से अधिक बच्चों को प्रशिक्षित किया है और पूरे भारत में 800 मंचों पर प्रदर्शन किया है.
  • वह बताते हैं कि यह कला, जिसका उपयोग महाराणा प्रताप और रानी लक्ष्मीबाई जैसे योद्धा करते थे, कई हमलावरों से बचाव करने में मदद करती है.
  • उनके बेटे राजकुमार रायकवार अब उनकी विरासत को आगे बढ़ा रहे हैं, अखाड़े का प्रबंधन कर रहे हैं और इस प्राचीन युद्ध कला की परंपरा को जीवित रख रहे हैं.

यह क्यों महत्वपूर्ण है?: भगवनदास रायकवार को बुंदेली युद्ध कला के संरक्षण के लिए पद्मश्री से सम्मानित किया गया है.

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