क्यों संन्यासियों का दाह संस्कार नहीं होता?
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News1802-02-2026, 14:12

साध्वी प्रेम बाईसा की समाधि: संन्यासियों के दाह संस्कार न होने की प्राचीन परंपरा का खुलासा

  • बालोतरा में साध्वी प्रेम बाईसा की 'भू-समाधि' ने संन्यासियों को दाह संस्कार के बजाय दफनाने की प्रथा पर लोगों की जिज्ञासा बढ़ाई.
  • सनातन धर्म में संन्यासियों के लिए 'समाधि' केवल अंतिम संस्कार नहीं, बल्कि एक आध्यात्मिक अवस्था है, उन्हें 'ब्रह्मलीन' या 'कैलाशवासी' माना जाता है.
  • केवल औपचारिक रूप से दीक्षित संन्यासी, मुख्य रूप से शैव और दशनामी संन्यासी, समाधि के पात्र होते हैं, सभी साधु नहीं.
  • संन्यास से पहले, एक प्रतीकात्मक 'पिंडदान' उन्हें सांसारिक बंधनों से मुक्त करता है, इसलिए उनके निधन पर दाह संस्कार नहीं होता.
  • समाधि की प्रक्रिया 16 दिनों तक चलती है, जिसमें चंदन लेप, गीता पाठ और 'षोडशी भंडारा' जैसे अनुष्ठान शामिल हैं.

यह क्यों महत्वपूर्ण है?: साध्वी प्रेम बाईसा की समाधि संन्यासियों के लिए 'समाधि' की अनूठी सनातन परंपरा को उजागर करती है, जो आध्यात्मिक मुक्ति का प्रतीक है.

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