सकट चौथ व्रत कथा: संकष्टी चतुर्थी का व्रत इस कथा के बिना अधूरा.
धर्म
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News1806-01-2026, 02:06

सकट चौथ व्रत कथा: संकष्टी चतुर्थी का व्रत इस कथा के बिना अधूरा.

  • सकट चौथ (संकष्टी चतुर्थी) का व्रत भगवान श्री गणेश को समर्पित है, और इसकी कथा के बिना यह अधूरा माना जाता है.
  • एक साहूकार की पत्नी ने संतान और विवाह के लिए भगवान गणेश से तिलकुट चढ़ाने का वचन दिया था, लेकिन उसे पूरा नहीं किया.
  • वचन भंग करने पर चौथ देव क्रोधित हुए और साहूकार के बेटे को विवाह मंडप से उठाकर पीपल के पेड़ पर बैठा दिया.
  • अपनी गलती का एहसास होने और बड़ा चढ़ावा चढ़ाने का वचन देने पर भगवान गणेश ने बेटे को वापस लौटाया और विवाह संपन्न हुआ.
  • यह कथा व्रत के दौरान किए गए वचनों को पूरा करने और भगवान गणेश की कृपा से सुख-समृद्धि प्राप्त करने का महत्व बताती है.

यह क्यों महत्वपूर्ण है?: सकट चौथ पर किए गए वचनों को पूरा करें, भगवान गणेश सभी बाधाएं दूर कर सुख-समृद्धि देते हैं.

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