श्री श्री रविशंकर: ध्यान की गहराई अभ्यास और वैराग्य में, मन को नियंत्रित करने में नहीं.

धर्म
N
News18•21-12-2025, 14:18
श्री श्री रविशंकर: ध्यान की गहराई अभ्यास और वैराग्य में, मन को नियंत्रित करने में नहीं.
- •श्री श्री रविशंकर के अनुसार, ध्यान की गहराई अभ्यास और वैराग्य में निहित है, न कि मन को नियंत्रित करने में.
- •मन की अस्थिर प्रकृति के कारण वह कभी 'आप' तक नहीं पहुँच सकता; ध्यान स्वयं को स्वीकार करने और 'नो-माइंड' स्थिति में आने के बारे में है.
- •महर्षि पतंजलि के अनुसार, सच्चा अभ्यास दीर्घकालिक, निरंतर और श्रद्धा के साथ होना चाहिए, न कि बोझ या यांत्रिक दिनचर्या के रूप में.
- •वैराग्य का अर्थ है इंद्रिय सुखों के बीच स्थिर रहना, दुनिया से भागना नहीं, जिससे मन इच्छाओं से मुक्त हो सके.
- •योग का अर्थ है कर्मों में कुशलता, जीवन में संतुलन और मन की जागरूकता, जो प्रेम जैसे भावों को स्थिरता प्रदान करता है.
यह क्यों महत्वपूर्ण है?: गहरे ध्यान के लिए निरंतर, श्रद्धापूर्ण अभ्यास और इंद्रिय सुखों से वैराग्य आवश्यक है.
✦
More like this
Loading more articles...





