श्री श्री रविशंकर.
धर्म
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News1829-12-2025, 18:17

रति की 3 अवस्थाएं: सूक्ष्म शरीर को पहचानें, इच्छाओं के जाल से मुक्ति पाएं.

  • रति के तीन स्तर हैं: शारीरिक, सूक्ष्म शरीर (मानसिक), और आत्मरति, जिसमें आत्मरति सर्वोच्च है.
  • शारीरिक रति क्षणिक संतुष्टि देती है, जबकि मानसिक रति क्रोध, मोह और अपराधों को जन्म देती है.
  • सूक्ष्म शरीर को न पहचानने से यौन विकृतियां और असंतुष्टि पैदा होती है, जिससे लोग विभिन्न प्रकार की रति खोजते हैं.
  • आत्मरति पूर्ण आत्म-संतुष्टि और आंतरिक आनंद प्रदान करती है, जिससे सांसारिक इच्छाएं महत्वहीन हो जाती हैं.
  • इच्छाएं सच्ची खुशी और जागरूकता में बाधा डालती हैं; उनसे मुक्ति का मार्ग उन्हें समर्पित करना या त्यागना है.

यह क्यों महत्वपूर्ण है?: सच्ची संतुष्टि आत्मरति से मिलती है, जो शारीरिक और मानसिक इच्छाओं से परे आंतरिक आनंद है.

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