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गुरुदेव श्री श्री रवि शंकर: प्रेम का वास्तविक स्वरूप जानें
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श्री श्री रवि शंकर: प्रेम अधिकार नहीं, अपनत्व है, जानें दिव्य प्रेम का असली स्वरूप.
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News18
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09-03-2026, 18:07
श्री श्री रवि शंकर: प्रेम अधिकार नहीं, अपनत्व है, जानें दिव्य प्रेम का असली स्वरूप.
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गुरुदेव बताते हैं कि दिव्य प्रेम समय के साथ बढ़ता है, ईर्ष्या और असुरक्षा से परे होता है.
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आकर्षण से प्रेम जन्म लेता है, लेकिन इसे अधिकार बनाने की कोशिश इसकी सुंदरता को कम कर देती है.
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भय से भरा प्रेम कभी पूरी तरह खिल नहीं पाता, ईर्ष्या और असुरक्षा के कारण समय के साथ फीका पड़ जाता है.
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दिव्य प्रेम बिना शर्त, असीमित के साथ साझा करना (भजन) है, जिसमें कृतज्ञता का सार घुला होता है.
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सच्चा प्रेम अपनत्व, विश्वास और ज्ञान पर आधारित होता है, जो मुक्त करता है और अनंत से जोड़ता है.
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