'इक्कीस' रिव्यू: अगस्त्य नंदा, धर्मेंद्र की फिल्म युद्ध के मानवीय पहलू को दिखाती है.

फिल्म समीक्षा
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News18•01-01-2026, 10:06
'इक्कीस' रिव्यू: अगस्त्य नंदा, धर्मेंद्र की फिल्म युद्ध के मानवीय पहलू को दिखाती है.
- •श्रीराम राघवन की 'इक्कीस' परमवीर चक्र विजेता सेकंड लेफ्टिनेंट अरुण खेत्रपाल पर आधारित एक युद्ध फिल्म है, जो भावनाओं और युद्ध के घावों पर केंद्रित है.
- •फिल्म की कहानी दो टाइमलाइन में चलती है: 1971 में अरुण खेत्रपाल का युद्ध और 2001 में उनके पिता का एक पूर्व पाकिस्तानी सैनिक से मिलना, जो इसे भावनात्मक गहराई देता है.
- •अगस्त्य नंदा ने अरुण खेत्रपाल के रूप में ईमानदार प्रदर्शन किया है, जबकि धर्मेंद्र का पिता के दर्द और गर्व का चित्रण बेहद मार्मिक है, यह उनकी आखिरी युद्ध फिल्म है.
- •श्रीराम राघवन का निर्देशन फिल्म की सबसे बड़ी ताकत है, जो शोर के बजाय प्रभाव पर जोर देता है, साथ ही जयदीप अहलावत और सिमर भाटिया का भी दमदार अभिनय है.
- •फिल्म जबरन देशभक्ति से बचती है और युद्ध को जिम्मेदारी, डर और निर्णयों के मानवीय दृष्टिकोण से दिखाती है, इसे 3.5/5 स्टार मिले हैं.
यह क्यों महत्वपूर्ण है?: 'इक्कीस' युद्ध के मानवीय और भावनात्मक पहलुओं को दर्शाने वाली एक शक्तिशाली फिल्म है.
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