सूरजकुंड मेले में खरेट देवजी की पुश्तैनी हथकरघा कला का जलवा, वैश्विक स्तर पर जीत रहे दिल

फरीदाबाद
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News18•03-02-2026, 23:20
सूरजकुंड मेले में खरेट देवजी की पुश्तैनी हथकरघा कला का जलवा, वैश्विक स्तर पर जीत रहे दिल
- •गुजरात के कच्छ के 54 वर्षीय खरेट देवजी भीमजी सूरजकुंड मेले, फरीदाबाद में पुश्तैनी हथकरघा कला का प्रदर्शन कर रहे हैं, जिसमें पारंपरिक पिट लूम तकनीकों का उपयोग किया जाता है.
- •उन्होंने अपने दादा और पिता से बुनाई सीखी, कभी कोई औपचारिक प्रशिक्षण नहीं लिया, और तब से 3500 लोगों को प्रशिक्षित किया है, जिससे हजारों लोगों को रोजगार मिला है.
- •उनके उत्पाद, जिनमें साड़ियां, स्टोल और कंबल शामिल हैं, 14 देशों में बेचे जाते हैं; 2500 रुपये का स्टोल बनाने में तीन दिन और 7500 रुपये की साड़ी बनाने में एक सप्ताह लगता है.
- •देवजी को कई पुरस्कार मिले हैं, जिनमें राष्ट्रीय प्रमाण पत्र (2002), राष्ट्रीय पुरस्कार (2007), और उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ द्वारा संत कबीर पुरस्कार (2023) शामिल हैं.
- •उनके परिवार में दस राष्ट्रीय पुरस्कार विजेता हैं; उनका लक्ष्य पद्म श्री प्राप्त करना है ताकि उनकी कला को और अधिक पहचान मिल सके, और अगले महीने वे श्रीलंका में भारत का प्रतिनिधित्व करेंगे.
यह क्यों महत्वपूर्ण है?: खरेट देवजी की पुश्तैनी हथकरघा कला के प्रति समर्पण सूरजकुंड मेले में पारंपरिक शिल्प कौशल और वैश्विक सफलता को दर्शाता है.
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