हजरत चिमनीशाह उर्स मेला 10 जनवरी से शुरू: ब्रिटिश काल की विरासत, सांप्रदायिक सद्भाव का प्रतीक.

धनबाद
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News18•09-01-2026, 19:25
हजरत चिमनीशाह उर्स मेला 10 जनवरी से शुरू: ब्रिटिश काल की विरासत, सांप्रदायिक सद्भाव का प्रतीक.
- •धनबाद के होरलाडीह में हजरत चिमनीशाह बाबा का 165वां वार्षिक सात दिवसीय उर्स मेला 10 जनवरी से 16 जनवरी तक चलेगा.
- •मेले में लगभग 20 प्रकार के झूले, जिनमें एक विदेशी रोलर कोस्टर भी शामिल है, और विभिन्न मनोरंजन विकल्प उपलब्ध होंगे.
- •चादरपोशी की रस्म 10 जनवरी से शुरू होगी, जिसमें BCCL के अधिकारी पहली चादर चढ़ाएंगे, उसके बाद ट्रांसजेंडर समुदाय और फिर आम श्रद्धालु चादर चढ़ाएंगे.
- •दरगाह की कहानी ब्रिटिश-युग की खदानों से जुड़ी है, जहाँ खनिक सुरक्षित वापसी के लिए बाबा को सम्मान देते थे, जिससे गहरी आस्था बनी.
- •यह मेला सांप्रदायिक सद्भाव का प्रतीक है, जिसमें सभी समुदायों के लोग इसकी सफलता में योगदान करते हैं, और 'गोल खाजला' व अन्य सामानों की विशेष खरीदारी की सुविधा है.
यह क्यों महत्वपूर्ण है?: धनबाद का हजरत चिमनीशाह उर्स मेला, ब्रिटिश-युग के इतिहास से जुड़ा, आस्था, एकता और मनोरंजन का उत्सव है.
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