" पहले माड भात खाते थे सब्जी नहीं मिलता था और अब सब्जी चिकन सब खाते हैं " गरीबी
रांची
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News1829-01-2026, 08:58

रांची की ऐमलिन ने बदली किस्मत: माड़-भात से चिकन तक, कारोबार से आया बदलाव

  • रांची की 50 वर्षीय ऐमलिन ने "ग्रामीण जनजातीय आजीविका" योजना के तहत काम करके अपने परिवार का जीवन माड़-भात से हफ्ते में दो बार चिकन खाने तक बदल दिया है.
  • पहले ऐमलिन खेती से परिवार चलाती थीं, लेकिन फसल खराब होने या बीमारी के कारण उनकी आय नगण्य रहती थी.
  • योजना के तहत ऋण मिलने के बाद, उन्होंने घर पर 45 से अधिक उत्पाद बनाना शुरू किया, जिनमें लड्डू, अचार, लाख की चूड़ियाँ, और पैकेटबंद आटा व मसाले शामिल हैं.
  • वह लाख की खेती से हर महीने 20,000 रुपये तक कमाती हैं और लगभग 20 प्रकार के अचार, शुद्ध आटा और मसाले पीसकर पैक करती हैं.
  • ऐमलिन अब हर महीने 35,000 से 40,000 रुपये कमाती हैं, अन्य महिलाओं को रोजगार देती हैं, और अपने उत्पाद किसान उत्पादक संगठनों, ऑनलाइन और सीधे घर से बेचती हैं.

यह क्यों महत्वपूर्ण है?: ऐमलिन की गरीबी से समृद्धि तक की यात्रा स्वरोजगार और सरकारी योजनाओं के प्रभाव को दर्शाती है.

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