1967 में रांची-हटिया में उर्दू भाषा विवाद के बाद भड़के दंगों की पूरी कहानी जानें. (फोटो AI)
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News1809-02-2026, 13:03

1967 रांची-हटिया दंगे: बिहार में एक भाषा के फैसले ने कैसे भड़काई थी खूनी हिंसा.

  • 1967 में बिहार के रांची-हटिया क्षेत्र में उर्दू को दूसरी आधिकारिक भाषा बनाने के सरकारी फैसले के बाद सात दिनों तक भयानक हिंसा हुई थी.
  • इस फैसले ने विरोध प्रदर्शनों को जन्म दिया, जिससे समुदायों के बीच झड़पें, पथराव और अफवाहों का तेजी से फैलना शुरू हो गया.
  • 22 अगस्त, 1967 को एक छात्र जुलूस के दौरान हिंसा भड़क उठी, जिसमें आगजनी, लूटपाट और बड़े पैमाने पर विनाश हुआ.
  • रघुबर दयाल आयोग की रिपोर्ट ने प्रशासनिक लापरवाही, संगठित भीड़ और अफवाहों को दंगे के बढ़ने के प्रमुख कारणों के रूप में उजागर किया.
  • आधिकारिक तौर पर, 184 लोगों की मौत हुई, जिनमें 164 मुस्लिम और 19 हिंदू शामिल थे, और 195 दुकानें जल गईं, जो भारत के सांप्रदायिक इतिहास में एक महत्वपूर्ण मोड़ था.

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