1964 में कोलकाता और पश्चिम बंगाल में हुए सांप्रदायिक दंगों की पूरी कहानी पढ़ें. (फोटो AI)
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News1805-02-2026, 11:05

1964 बंगाल दंगे: पूर्वी पाकिस्तान के शरणार्थी और हजरतबल की अफवाह ने भड़काई सांप्रदायिक हिंसा

  • जनवरी 1964 में कोलकाता में पूर्वी पाकिस्तान से आए शरणार्थियों के साथ धार्मिक हिंसा की दर्दनाक कहानियों ने डर का माहौल पैदा किया.
  • दिसंबर 1963 में श्रीनगर के हजरतबल दरगाह से पैगंबर मोहम्मद के बाल चोरी होने की अफवाह को धार्मिक अपमान के रूप में फैलाया गया, जिससे पूर्वी पाकिस्तान में हिंदुओं पर हमले हुए.
  • इसके जवाब में 11 जनवरी से कोलकाता और ग्रामीण 24 परगना में सांप्रदायिक हिंसा भड़क उठी, जिसमें भीड़ ने मुस्लिम इलाकों को निशाना बनाया, दुकानों में तोड़फोड़ की और घरों में आग लगा दी.
  • प्रशासन ने सेना तैनात की और कर्फ्यू लगाया; आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार 264 लोगों की मौत हुई, हालांकि स्वतंत्र रिपोर्टों में यह संख्या अधिक बताई गई है.
  • इन दंगों ने लगभग 70,000 मुसलमानों को विस्थापित किया, भारत-पाकिस्तान संबंधों में तनाव बढ़ाया और नेहरू के अंतिम राजनीतिक चरण के दौरान भारत की धर्मनिरपेक्ष पहचान को गंभीर चुनौती दी.

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