मंडल आरक्षण: 34 साल पहले सुप्रीम कोर्ट का ऐतिहासिक फैसला और 9 जजों की भूमिका

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News18•02-02-2026, 12:52
मंडल आरक्षण: 34 साल पहले सुप्रीम कोर्ट का ऐतिहासिक फैसला और 9 जजों की भूमिका
- •1992 में इंदिरा साहनी बनाम भारत संघ मामले में मंडल आरक्षण पर सुप्रीम कोर्ट की 9 जजों की पीठ ने फैसला सुनाया था.
- •तत्कालीन मुख्य न्यायाधीश एम.एच. कानिया की अध्यक्षता वाली पीठ ने 27% ओबीसी आरक्षण को 6:3 के बहुमत से बरकरार रखा, जिसमें न्यायमूर्ति बी.पी. जीवन रेड्डी ने मुख्य बहुमत का फैसला लिखा.
- •फैसले के मुख्य निष्कर्षों में 50% आरक्षण की सीमा और 'क्रीमी लेयर' सिद्धांत का अनिवार्य पालन शामिल था.
- •बहुमत के कई न्यायाधीश, जिनमें एम.एन. वेंकटचलैया और ए.एम. अहमदी शामिल थे, बाद में भारत के मुख्य न्यायाधीश बने, जबकि असहमति जताने वाले न्यायमूर्ति कुलदीप सिंह "ग्रीन जज" के नाम से जाने गए.
- •वकील और सामाजिक कार्यकर्ता इंदिरा साहनी ने वी.पी. सिंह सरकार के मंडल आयोग की सिफारिशों को लागू करने के फैसले को चुनौती देते हुए याचिका दायर की थी.
यह क्यों महत्वपूर्ण है?: 1992 के सुप्रीम कोर्ट के फैसले ने भारत की आरक्षण नीति के लिए महत्वपूर्ण मिसालें कायम कीं.
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