कुलिंग्राम: पूर्व बर्दवान का यह गांव साहित्य, इतिहास और परंपरा का संगम, आज भी चमक रहा है.

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News18•13-02-2026, 00:18
कुलिंग्राम: पूर्व बर्दवान का यह गांव साहित्य, इतिहास और परंपरा का संगम, आज भी चमक रहा है.
- •पूर्व बर्दवान का कुलिंग्राम गांव बंगाली साहित्य के इतिहास से गहराई से जुड़ा है, जो 'श्रीकृष्णविजय' के लेखक मालाधर बसु का जन्मस्थान है.
- •मालाधर बसु, जिन्हें गौड़ के पठान सुल्तान द्वारा 'गुणराज खान' की उपाधि से सम्मानित किया गया था, ने व्यासदेव के संस्कृत भागवत पुराण के दशम स्कंध का बंगाली में अनुवाद किया.
- •बसु के पुत्र सत्यराज खान और पोते रामानंद बसु, जो चैतन्यदेव के करीबी सहयोगी थे, के प्रयासों से यह गांव एक महत्वपूर्ण वैष्णव सांस्कृतिक केंद्र बन गया.
- •श्री चैतन्यदेव ने स्वयं कुलिंग्राम का दौरा किया, और इस गांव को एक वैष्णव तीर्थस्थल के रूप में मान्यता मिली.
- •कुलिंग्राम में एक जगन्नाथ देव मंदिर और अन्य देवताओं के मंदिर हैं, जो रथ यात्रा और जन्माष्टमी के दौरान भारत और विदेशों से भक्तों को आकर्षित करते हैं.
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