फागुन-चैत में दही खाने से बचें ये लोग, फायदे की जगह होगा नुकसान: आयुर्वेद

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News18•27-02-2026, 09:58
फागुन-चैत में दही खाने से बचें ये लोग, फायदे की जगह होगा नुकसान: आयुर्वेद
- •आयुर्वेदाचार्य डॉ. रंजन कुमार के अनुसार, फागुन-चैत (फरवरी-मार्च) में दही का सेवन सोच-समझकर करना चाहिए क्योंकि आयुर्वेद में इसे 'अभिष्यंदी' कहा गया है, जो शरीर के स्रोतों में रुकावट पैदा कर सकता है.
- •वसंत ऋतु में मौसम के बदलाव से शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता और पाचन शक्ति प्रभावित होती है, ऐसे में दही का सेवन कफ बढ़ा सकता है और सर्दी, खांसी, गले में खराश या एलर्जी जैसी समस्याएं बढ़ा सकता है.
- •आयुर्वेदिक ग्रंथों के अनुसार, शरद, ग्रीष्म और वसंत ऋतु में दही का सेवन हानिकारक माना गया है, क्योंकि इन मौसमों में यह कफ और पाचन संबंधी समस्याओं को बढ़ा सकता है, खासकर जब जठराग्नि कमजोर हो.
- •हेमंत और शिशिर ऋतु में दही का सेवन फायदेमंद होता है क्योंकि तब पाचन शक्ति मजबूत होती है; वर्षा ऋतु में सीमित मात्रा में ले सकते हैं, लेकिन वसंत से जुलाई तक नियमित सेवन से बचना चाहिए.
- •यदि दही का सेवन करना ही हो तो गाढ़े दही की बजाय मट्ठा या बिलोकर खाया हुआ दही अधिक उपयुक्त है क्योंकि यह हल्का और सुपाच्य होता है; अस्थमा, एलर्जी या बवासीर वाले लोगों को विशेष सावधानी बरतनी चाहिए.
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