इस क्रिया के साथ अंतिम संस्कार की परंपरा पूरी होती है.
खंडवा
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News1828-12-2025, 05:43

निमाड़ की अनोखी परंपरा: आत्मा की शांति के लिए काठी और बांस तोड़ने का सदियों पुराना रिवाज.

  • मध्य प्रदेश के निमाड़ क्षेत्र में मृत्यु के बाद काठी और बांस तोड़ने की एक सदियों पुरानी, अनोखी परंपरा निभाई जाती है.
  • शवदाह के बाद चिता की लकड़ियों ('काठी') को तोड़कर श्मशान घाट पर ही छोड़ दिया जाता है, ताकि आत्मा को शांति मिले और वह भटके नहीं.
  • शव को ले जाने वाली बांस की अर्थी से एक बांस भी धार्मिक अनुष्ठान के तहत तोड़ा जाता है.
  • पंडित लव जोशी के अनुसार, 'कपाल क्रिया' में 'कपाल' (आत्मा का निवास स्थान) को भेदा जाता है, जिससे आत्मा के लिए मोक्ष का मार्ग खुलता है.
  • काठी तोड़ने का उद्देश्य आत्मा को सांसारिक मोह-माया से मुक्त करना है, ताकि वह वापस न लौटे और ईश्वर में विलीन हो जाए.

यह क्यों महत्वपूर्ण है?: निमाड़ की यह परंपरा आत्मा की शांति और सांसारिक बंधनों से मुक्ति सुनिश्चित करती है.

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