धूनी रमाए बैठे संत.
खरगोन
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News1827-01-2026, 21:47

नर्मदा किनारे संतों की अग्नि साधना: सिर पर जलता खप्पर, घंटों तप का रहस्य

  • खरगोन के बरवाह स्थित सुंदर धाम आश्रम में संत कोठ खप्पर धूनी तपस्या कर रहे हैं, जिसमें सिर पर जलता खप्पर रखकर अग्नि के घेरे में साधना की जाती है.
  • यह प्राचीन परंपरा बसंत पंचमी से गंगा दशहरा तक चलेगी, जो 70-80 साल पुरानी है और नर्मदा तट पर भक्तों का आकर्षण बनी हुई है.
  • महामंडलेश्वर बालकदास महाराज के मार्गदर्शन में प्रतिदिन दोपहर 12 बजे से 3 बजे तक यह तपस्या की जाती है, जिसमें जलते हुए गोबर के कंडे के घेरे में बैठा जाता है.
  • कोठ खप्पर धूनी तपस्या के छह चरण हैं, जिनमें पंच धूनी, सप्त धूनी और द्वादश धूनी शामिल हैं, प्रत्येक चरण लगभग तीन साल का होता है, कुल तपस्या पूरी होने में 18 साल लगते हैं.
  • अप्रैल-मई की भीषण गर्मी के बावजूद, संत लोक कल्याण के लिए डेढ़ से तीन घंटे तक प्रतिदिन कठोर तपस्या करते हैं, 70 साल पुरानी परंपरा को निभाते हुए.

यह क्यों महत्वपूर्ण है?: नर्मदा तट पर संत लोक कल्याण हेतु 70 साल पुरानी अग्नि तपस्या जारी रखे हुए हैं, भीषण परिस्थितियों में भी.

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