विंध्य के विवाह की अनोखी रस्म परछन, जिसके बिना नहीं होता वधू का गृहप्रवेश.
रीवा
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News1811-01-2026, 15:23

विंध्य की शादियों में आज भी निभाई जाती है परछन रस्म, वधू का गृहप्रवेश अधूरा

  • विंध्य क्षेत्र, खासकर बघेलखंड में, परछन रस्म शादियों का एक अनूठा और अनिवार्य हिस्सा है.
  • इस परछन रस्म के बिना वधू का गृहप्रवेश अधूरा माना जाता है.
  • परछन तीन प्रकार का होता है: बारात निकलने से पहले, वधू के घर आने पर (डोला परछन), और बेटी की विदाई के समय.
  • परछन के दौरान महिलाएं दूल्हे या जोड़े को आशीर्वाद देती हैं, जिसमें मंगल कलश, ज्योति और पारंपरिक गीत शामिल होते हैं.
  • आधुनिकीकरण के बावजूद, छत्तीसगढ़ के ग्रामीण इलाकों में परछन और अन्य पारंपरिक रस्में आज भी निभाई जाती हैं.

यह क्यों महत्वपूर्ण है?: परछन रस्म विंध्य की शादियों में एक महत्वपूर्ण और अनूठी परंपरा बनी हुई है, जो वधू के शुभ गृहप्रवेश को सुनिश्चित करती है.

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