बंधुआ मजदूर से सरपंच बनी लिंगम्मा: लोकतंत्र की सच्ची ताकत का प्रमाण.

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News18•20-12-2025, 17:22
बंधुआ मजदूर से सरपंच बनी लिंगम्मा: लोकतंत्र की सच्ची ताकत का प्रमाण.
- •नागरकुर्नूल जिले की चेन्चू जनजाति की पूर्व बंधुआ मजदूर पुरुसला लिंगम्मा तेलंगाना के अमरागिरी गांव की सरपंच चुनी गईं.
- •लगभग 40 वर्षीय निरक्षर लिंगम्मा ने नल्लामाला के जंगलों में सालों तक बंधुआ मजदूरी की, कुछ साल पहले अधिकारियों ने उन्हें मुक्त कराया था.
- •उनका परिवार कर्ज में डूबा था, पीढ़ियों से मजदूरी कर रहा था और अक्सर उन्हें खाने को भी नहीं मिलता था.
- •गांववालों और अधिकारियों ने उनके कल्याणकारी कार्यों के कारण उन्हें एसटी-आरक्षित सीट से चुनाव लड़ने के लिए प्रोत्साहित किया, भले ही उन्हें अपने छोटे भाई के खिलाफ चुनाव लड़ना पड़ा.
- •लिंगम्मा का लक्ष्य गांव में सड़क, पानी और बिजली जैसी सुविधाओं में सुधार करना है; उन्होंने अपनी बेटी को शिक्षित किया है, जो अब एक आंगनवाड़ी शिक्षिका है.
यह क्यों महत्वपूर्ण है?: लिंगम्मा की बंधुआ मजदूरी से सरपंच बनने तक की यात्रा लोकतंत्र की परिवर्तनकारी शक्ति का प्रतीक है.
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