भारत-श्रीलंका समझौता 1987 में हरदीप सिंह पुरी का अहम रोल था. (फाइल फोटो)
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News1815-02-2026, 05:06

घना जंगल, लैंड माइंस... जब जान पर खेलकर जाफना में घुसे थे हरदीप पुरी, LTTE चीफ प्रभाकरण से हुआ सामना.

  • केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी का जीवन किसी थ्रिलर फिल्म से कम नहीं है, जिसमें 1980 के दशक का एक साहसी मिशन शामिल है.
  • एक IFS अधिकारी के रूप में, पुरी ने श्रीलंका के गृहयुद्ध के दौरान जाफना में LTTE प्रमुख वेलुपिल्लई प्रभाकरण से मिलने के लिए अपनी जान जोखिम में डाली.
  • यह मिशन 1987 के भारत-श्रीलंका शांति समझौते के लिए महत्वपूर्ण था, जिसके लिए प्रभाकरण की सहमति आवश्यक थी.
  • पुरी घने जंगलों और लैंड माइंस से होते हुए प्रभाकरण के ठिकाने तक पहुंचे, उन्होंने अपार साहस और कूटनीति का प्रदर्शन किया.
  • उन्होंने प्रभाकरण की सुरक्षित वापसी का आश्वासन दिया, जिससे जुलाई 1987 में ऐतिहासिक समझौते पर सफलतापूर्वक हस्ताक्षर हुए.

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