22 जनवरी 1948 की रात. पाकिस्तान के खैबर पख्तूनख्वा प्रांत में क़ुर्रम ज़िले में कोहराम मच गया.
शिमला
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News1823-01-2026, 09:41

पाराचिनार नरसंहार: 11 साल के हरवंश गुलाटी ने बताई 1948 की खौफनाक कहानी, हिमाचल तक का सफर

  • हरवंश गुलाटी, जो उस समय 11 साल के थे, ने 22 जनवरी 1948 को पाकिस्तान के खैबर पख्तूनख्वा में हुए पाराचिनार नरसंहार का अपना आँखों देखा हाल बताया है.
  • हिंदुओं को जबरन टेंटों में रखा गया, धर्म परिवर्तन के लिए दबाव डाला गया, और इनकार करने पर अंधाधुंध गोलीबारी की गई, जिससे बड़े पैमाने पर हत्याएं हुईं.
  • भारत सरकार के हस्तक्षेप के बाद और खून-खराबा रुका, और हरवंश गुलाटी सहित बचे हुए लोग अंततः भारत पहुंचे, पहले कुरुक्षेत्र में.
  • पीड़ितों ने तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू से मुलाकात की और ठंडे क्षेत्रों में बसने की इच्छा व्यक्त की, जिसके बाद कई लोग मसूरी, शिमला, देहरादून और चंबा में बस गए.
  • चंबा में पाराचिनार समुदाय आज भी पाकिस्तान से लाए गए एक गुरु ग्रंथ साहिब को सुरक्षित रखे हुए है, और 22 जनवरी को शहादत दिवस के रूप में मनाता है.

यह क्यों महत्वपूर्ण है?: एक जीवित बचे व्यक्ति का विवरण 1948 के भयानक पाराचिनार नरसंहार और समुदाय के भारत तक के सफर को उजागर करता है.

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