खड़गे बोले, सामाजिक न्याय केवल नारा नहीं, संविधान की आत्मा है.

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News18•12-02-2026, 13:14
खड़गे बोले, सामाजिक न्याय केवल नारा नहीं, संविधान की आत्मा है.
- •राज्यसभा में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे ने कहा कि सामाजिक न्याय केवल नारा नहीं, बल्कि संविधान की आत्मा है और दलितों व वंचितों के उत्थान के लिए ठोस पहल की आवश्यकता है.
- •उन्होंने ओडिशा की एक घटना का जिक्र किया, जहां एक दलित महिला द्वारा भोजन बनाने के कारण तीन महीने से आंगनवाड़ी केंद्र का बहिष्कार किया जा रहा है, इसे संवैधानिक मूल्यों का अपमान बताया.
- •खड़गे ने कहा कि आंगनवाड़ियों में ऐसा भेदभाव बच्चों में विभाजन के बीज बोता है और संविधान के अनुच्छेद 21(ए) के तहत शिक्षा के अधिकार तथा अनुच्छेद 47 के तहत पोषण के राज्य के दायित्व को कमजोर करता है.
- •उन्होंने मध्य प्रदेश में एक आदिवासी मजदूर, गुजरात में एक दलित सरकारी कर्मचारी और चंडीगढ़ में संस्थागत भेदभाव जैसी अन्य घटनाओं का हवाला दिया, जो व्यापक जातिगत पूर्वाग्रह को दर्शाती हैं.
- •खड़गे ने सरकार से ऐसे मामलों की त्वरित और निष्पक्ष जांच, दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई और आंगनवाड़ियों जैसे संवेदनशील संस्थानों में सामाजिक सद्भाव को बढ़ावा देने के लिए जागरूकता अभियान चलाने का आग्रह किया.
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