मद्रास हाई कोर्ट के जस्टिस जी. आर. स्वामीनाथन ने नथम कनवाई युद्ध स्मारक की अनुमति देते हुए स्टेन स्वामी के मेमोरियल का हवाला दिया. (फाइल फोटो PTI)
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News1801-01-2026, 20:18

जस्टिस स्वामिनाथन फिर चर्चा में: नथम कनवाई युद्ध स्मारक को मंजूरी, इतिहास पर उठाए सवाल.

  • मद्रास हाई कोर्ट के जस्टिस जी. आर. स्वामिनाथन, जो पहले एक मंदिर संबंधी फैसले के लिए आलोचना में थे, एक नए आदेश के कारण फिर सुर्खियों में हैं.
  • उन्होंने 1755 के नथम कनवाई युद्ध के स्मारक स्तूप के निर्माण को मंजूरी दी, जहां मेलूर कल्लर समुदाय ने अंग्रेजों को हराया था, जबकि तहसीलदार ने अनुमति देने से इनकार कर दिया था.
  • जस्टिस स्वामिनाथन ने सवाल उठाया कि ऐसे युद्ध आजादी के प्रतीक क्यों न बनें और स्टैन स्वामी स्मारक का हवाला देकर सरकार के दोहरे मापदंडों पर सवाल उठाए.
  • कोर्ट ने भारत के औपनिवेशिक प्रतिरोध की स्मृति को संरक्षित करने की आवश्यकता पर जोर दिया ताकि वर्तमान पीढ़ी को मुक्ति के ऐतिहासिक संघर्षों के बारे में शिक्षित किया जा सके.
  • नथम कनवाई युद्ध में मेलूर कल्लर समुदाय ने ब्रिटिश कर्नल अलेक्जेंडर हेरॉन द्वारा थिरुमोगुर मंदिर से लूटी गई मूर्तियों को वापस हासिल किया था.

यह क्यों महत्वपूर्ण है?: कोर्ट ने नथम कनवाई युद्ध स्मारक को मंजूरी दी, भारत के भूले हुए औपनिवेशिक प्रतिरोध को पहचानने का आग्रह किया.

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