इलेक्‍टोरल बॉन्‍ड कानून रद्द होने के बाद पहले फाइनेंशियल ईयर में राजनीतिक दलों को चंदा देने के मामले में तीन गुना तक की वृद्धि दर्ज की गई है. (सांकेतिक तस्‍वीर)
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News1821-12-2025, 08:13

इलेक्टोरल बॉन्ड रद्द होते ही राजनीतिक दलों की फंडिंग तीन गुना बढ़ी.

  • सुप्रीम कोर्ट द्वारा इलेक्टोरल बॉन्ड योजना रद्द करने के बाद FY 2024-25 में राजनीतिक दलों की फंडिंग तीन गुना बढ़कर ₹3811 करोड़ हो गई.
  • नौ इलेक्टोरल ट्रस्टों ने कुल ₹3811 करोड़ दान किए, जो पिछले वित्त वर्ष के ₹1218 करोड़ से काफी अधिक है.
  • भाजपा को सबसे बड़ा हिस्सा ₹3112 करोड़ (82%) मिला, जबकि कांग्रेस को ₹299 करोड़ (8%) प्राप्त हुए.
  • प्रूडेंट इलेक्टोरल ट्रस्ट भाजपा का सबसे बड़ा दानदाता था, जिसे जिंदल स्टील एंड पावर, मेघा इंजीनियरिंग, भारती एयरटेल जैसी कंपनियों से फंड मिला.
  • टाटा ग्रुप की कंपनियों ने प्रोग्रेसिव इलेक्टोरल ट्रस्ट को फंड दिया, जिसने भी बड़े पैमाने पर भाजपा को दान किया.

यह क्यों महत्वपूर्ण है?: इलेक्टोरल बॉन्ड रद्द होने के बाद चुनावी ट्रस्टों के माध्यम से राजनीतिक दान तीन गुना बढ़ गया.

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