मुगली आक्रांता के सामने साहिबजादा जोरावर सिंह और साहिबजादा फतेह सिंह बिना किसी भय के खड़े रहे.
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News1826-12-2025, 01:51

मुगलों की क्रूरता: साहिबजादों की बहादुरी से हिल गया वजीर खां का तख्त.

  • गुरु गोबिंद सिंह जी के पुत्र साहिबजादा जोरावर सिंह (9) और फतेह सिंह (7) ने 26 दिसंबर 1705 को धर्म परिवर्तन से इनकार पर शहादत दी.
  • आनंदपुर साहिब छोड़ने के बाद वे अपनी दादी माता गुजरी जी के साथ पकड़े गए और गनग द्वारा नवाब वजीर खां को सौंप दिए गए.
  • ठंडा बुर्ज में यातना और वजीर खां के प्रलोभनों के बावजूद, साहिबजादों ने अपने धर्म और सिद्धांतों को दृढ़ता से बनाए रखा.
  • नवाब वजीर खां ने उन्हें जिंदा दीवार में चिनवाने का क्रूर आदेश दिया, जिसका उन्होंने अटूट साहस से सामना किया.
  • 26 दिसंबर को अब वीर बाल दिवस के रूप में मनाया जाता है, जिसकी घोषणा 2022 में पीएम नरेंद्र मोदी ने बच्चों की बहादुरी के सम्मान में की थी.

यह क्यों महत्वपूर्ण है?: वीर बाल दिवस पर साहिबजादों का बलिदान दर्शाता है कि सच्ची बहादुरी उम्र से नहीं, आंतरिक शक्ति से आती है.

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