मोहन भागवत: भारत को महाशक्ति नहीं, विश्वदेव बनना है.

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News18•07-02-2026, 21:56
मोहन भागवत: भारत को महाशक्ति नहीं, विश्वदेव बनना है.
- •आरएसएस सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत ने कहा कि भारत की आकांक्षा महाशक्ति बनने की नहीं, बल्कि 'विश्वदेव' (वैश्विक मार्गदर्शक/नेता) बनने की है, जो डर पैदा नहीं करता.
- •उन्होंने आंतरिक मूल्यों के माध्यम से नेतृत्व करने, प्रदर्शन, संस्कृति और आदर्श व्यवहार से दूसरों को प्रेरित करने पर जोर दिया, न कि बाहरी प्रभुत्व से.
- •भागवत ने भारत के धार्मिक स्वरूप पर प्रकाश डाला, समानता, सामूहिक प्रगति और सक्रिय सामाजिक भागीदारी की वकालत की.
- •उन्होंने हिंदू परंपरा को दुनिया की सबसे पुरानी परंपरा बताया, इस बात पर जोर दिया कि शिक्षा व्याख्यान से नहीं, बल्कि व्यवहार से होती है.
- •आरएसएस, अपने 100 साल पूरे होने का जश्न मना रहा है, सरकार के धन के बिना 130,000 से अधिक सेवा गतिविधियाँ चलाता है, भागवत ने संघ की अनूठी प्रकृति और 'हिंदू' शब्द को भारत में रहने वाले किसी भी व्यक्ति के लिए एक विशेषण के रूप में वर्णित किया.
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