European Commission President Ursula von der Leyen (left) and Prime Minister Narendra Modi. (Source: AFP/File)
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Moneycontrol27-01-2026, 11:42

ईयू-भारत एफटीए: 22 साल की यात्रा भारत की बदलती व्यापार रणनीति को दर्शाती है.

  • प्रस्तावित ईयू-भारत मुक्त व्यापार समझौता (एफटीए) 22 वर्षों से बातचीत के अधीन है, जो एक जटिल और विकसित यात्रा को दर्शाता है.
  • 2007 में बीटीआईए के तहत प्रारंभिक वार्ता का उद्देश्य व्यापक कवरेज था, लेकिन टैरिफ (ऑटोमोबाइल, वाइन, स्पिरिट), बौद्धिक संपदा और बाजार पहुंच, विशेष रूप से संवेदनशील कृषि क्षेत्रों पर असहमति के कारण 2013 तक ढह गई.
  • 2013-2021 के बीच यूरोज़ोन संकट, ब्रेक्जिट और ट्रंप की व्यापार नीतियों जैसे वैश्विक बदलावों ने भारत को अपने व्यापार दृष्टिकोण को फिर से कैलिब्रेट करने के लिए प्रेरित किया, जिसमें बड़े ब्लॉकों पर राष्ट्रीय हित को प्राथमिकता दी गई (उदाहरण के लिए, आरसीईपी से बाहर निकलना).
  • भू-राजनीति और आपसी आवश्यकता से प्रेरित होकर 2022 में वार्ता फिर से शुरू हुई, जो तीन ट्रैक में विभाजित हुई: एफटीए, निवेश संरक्षण और भौगोलिक संकेत, जिसमें जलवायु विनियमन और स्थिरता जैसी नई चिंताओं पर ध्यान केंद्रित किया गया.
  • एफटीए का महत्व भारतीय व्यवसायों के लिए नियामक पूर्वानुमेयता और दीर्घकालिक बाजार पहुंच में निहित है, हालांकि तत्काल लाभ बढ़ती हरित अनुपालन लागत और डेयरी तथा सार्वजनिक खरीद जैसे लगातार संवेदनशील मुद्दों से सीमित हो सकते हैं.

यह क्यों महत्वपूर्ण है?: ईयू-भारत एफटीए की 22 साल की यात्रा घरेलू राजनीति और वैश्विक बदलावों से आकार लेती भारत की अनुकूली व्यापार रणनीति को उजागर करती है.

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