राय: कैसे 'पुत्रों का उदय' राजनीतिक दलों की दिशा मोड़ रहा है
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भारतीय राजनीति में 'पुत्र उदय': पार्टियों को झुका रहा, लोकतंत्र को बिगाड़ रहा.
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Moneycontrol•11-03-2026, 17:20
भारतीय राजनीति में 'पुत्र उदय': पार्टियों को झुका रहा, लोकतंत्र को बिगाड़ रहा.
•भारतीय राजनीतिक दलों में 'पुत्र उदय' या वंशवादी राजनीति व्यापक है, नीतीश कुमार की जद-यू से लेकर एनसीपी और कांग्रेस तक.
•हाल के उदाहरणों में निशांत कुमार (नीतीश कुमार के बेटे), पार्थ पवार (अजित पवार के बेटे) और नितिन नवीन (भाजपा) शामिल हैं.
•यह प्रवृत्ति के टी रामा राव, के कविता, नारा लोकेश, वाईएसआर जगन मोहन रेड्डी, उदयनिधि स्टालिन, बी एस विजयेंद्र और महाराष्ट्र में ठाकरे व राणे परिवारों जैसे क्षेत्रीय दलों तक फैली हुई है.
•यह घटना, अक्सर "लाभदायक पेशे" की मानसिकता से प्रेरित होकर, लोकतंत्र को विकृत करती है और पार्टियों को कमजोर करती है, जैसा कि कांग्रेस और क्षेत्रीय संगठनों के साथ देखा गया है.
•नेता अक्सर योग्य अनुयायियों को दरकिनार कर परिवार के सदस्यों को कमान सौंपते हैं, वाम दल इसका एक उल्लेखनीय अपवाद हैं.