Holi Dhamal Barmer
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News1827-02-2026, 12:30

300 साल पुरानी 'धमाल' से गूंज उठती है सरहद, होली पर जुड़ते हैं भारत-पाक के दिल.

  • भारत-पाकिस्तान सीमा पर 300 साल पुरानी 'धमाल' परंपरा होली के दौरान सरहद की दूरियों को मिटा देती है.
  • थारपारकर से बाड़मेर तक, होली पर ढोलक की थाप से यह साझा सांस्कृतिक विरासत जीवंत हो उठती है.
  • दोनों ओर के ढाट माहेश्वरी समुदाय के सदस्य कृष्ण और राधा मंदिरों में धमाल गाकर इस परंपरा का पालन करते हैं.
  • धमाल केवल रात में होती है, जिसमें प्रतिभागी लगभग दो घंटे तक कृष्ण और राधा की कहानियाँ गाते हैं.
  • धमाल के बाद, चने की दाल से बनी 'फागुआ प्रसादी' देवताओं को अर्पित की जाती है और भक्तों में वितरित की जाती है.

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