7 गांवों की 'सतराली की होली' से जीवंत हुई सदियों पुरानी परंपरा, बागनाथ में उमड़ा जनसैलाब.

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News18•19-02-2026, 20:02
7 गांवों की 'सतराली की होली' से जीवंत हुई सदियों पुरानी परंपरा, बागनाथ में उमड़ा जनसैलाब.
- •अल्मोड़ा के 7 गांवों की 'सतराली की होली' बागेश्वर के बागनाथ मंदिर में मनाई जाती है, जो एक अनूठी लोक परंपरा है.
- •होली के लिए अल्मोड़ा के तकुला क्षेत्र के सात गांवों से होल्यारों का दल पारंपरिक वेशभूषा में ढोल-दमाऊं के साथ बागनाथ मंदिर पहुंचता है.
- •यहां भगवान शिव की पूजा के बाद बैठकी होली के शास्त्रीय और लोकगीत गाए जाते हैं, जिससे पूरा मंदिर परिसर रंगों से भर जाता है.
- •कोटवालगांव, कांडे, लोहना, खाड़ी, झाड़कोट, पनेरगांव और थापला मिलकर 'सतराली' कहलाते हैं, जिनके पूर्वजों ने बागनाथ मंदिर में धूनी बनवाई थी.
- •यह परंपरा 'चिर बंधन' और गणनाथ मंदिर में सामूहिक होली गायन के माध्यम से दो जिलों के बीच सदियों पुराने सांस्कृतिक संबंधों को मजबूत करती है.
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