भीलवाड़ा में 'जिंदा मुर्दे' की अर्थी यात्रा: 428 साल पुरानी परंपरा, महिलाएं वर्जित, युवक भागा.
भीलवाड़ा में 'जिंदा मुर्दे' की अर्थी यात्रा: 428 साल पुरानी परंपरा, महिलाएं वर्जित, युवक भागा.
- •राजस्थान के भीलवाड़ा में शीतला सप्तमी पर 428 साल से 'जिंदा मुर्दे' की अर्थी यात्रा की अनोखी परंपरा निभाई जाती है.
- •एक जीवित युवक को अर्थी पर लिटाकर चित्तौड़ वालों की हवेली से शहर में जुलूस निकाला जाता है, जहां लोग रंग-गुलाल उड़ाते और नाचते हैं.
- •महिलाओं का प्रवेश वर्जित है क्योंकि यह परंपरा कटुता निकालने और सामाजिक सद्भाव बढ़ाने के लिए व्यंग्य का उपयोग करती है.
- •यात्रा के दौरान 'मुर्दा' युवक कभी उठ बैठता है या पानी पीता है, जिसे देखने भीलवाड़ा और आसपास से हजारों लोग आते हैं.
- •बड़े मंदिर में प्रतीकात्मक दाह संस्कार से ठीक पहले, युवक अर्थी से कूदकर भीड़ में गायब हो जाता है, जिसके बाद केवल अर्थी का दाह संस्कार होता है.