बीकानेर की धूप-हवा का जादू: असम-कर्नाटक से आई कच्ची सुपारी बनी 'बीकानेरी-मारवाड़ी ब्रांड'
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बीकानेर की धूप-हवा का कमाल! कच्ची सुपारी बनी 'बीकानेरी-मारवाड़ी ब्रांड'.
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News18•20-02-2026, 08:13
बीकानेर की धूप-हवा का कमाल! कच्ची सुपारी बनी 'बीकानेरी-मारवाड़ी ब्रांड'.
•भुजिया और रसगुल्ले के बाद बीकानेर में सुपारी तीसरा सबसे अधिक खपत वाला खाद्य उत्पाद बन गया है.
•असम और कर्नाटक से आने वाली कच्ची सुपारी को बीकानेर की तेज धूप और शुष्क हवा में सुखाया जाता है, जिससे उसका रंग, स्वाद और बनावट बदल जाती है.
•बीकानेर में धूप में सुखाने से सुपारी की 'गर्म' प्रकृति 'ठंडी' मानी जाती है, जिससे 'मारवाड़ी सुपारी' या 'बीकानेरी सुपारी' की देश-विदेश में मांग बढ़ गई है.
•असम की सुपारी 700-800 रुपये/किलो और कर्नाटक की सुपारी 1000-1600 रुपये/किलो तक बिकती है; चिकनी सुपारी की मांग मीठी सुपारी बनाने के लिए अधिक है.
•यह उद्योग 600-700 लोगों को रोजगार देता है, जिसमें सुखाने, काटने, पॉलिश करने और पैकेजिंग का काम शामिल है, मासिक खपत लगभग 300 टन है.