
मशीन-मुक्त खेसला की वैश्विक मांग को इसकी अनूठी विशेषताओं और पारंपरिक कारीगरी को उजागर करके बढ़ाया जा सकता है।
राजस्थानी हस्तशिल्प को पुनर्जीवित करने में वैश्विक पहुंच के माध्यम से पारंपरिक कलाओं को बढ़ावा देना, आधुनिक तकनीक को शामिल करना और नई पीढ़ियों को प्रशिक्षित करना शामिल है।
खेसला जैसे हस्तनिर्मित उत्पाद अपनी अनूठी विशेषताओं और पारंपरिक कारीगरी के कारण आज भी मूल्यवान बने हुए हैं।