रेगिस्तान में बहुतायत में होने वाली खेजड़ी आज सरक्षंण के लिए कर रहे आंदोलन
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News1804-02-2026, 08:53

खेजड़ी: मरुस्थल का कल्पवृक्ष विलुप्ति के कगार पर, संरक्षण की मांग

  • खेजड़ी, जिसे 'मरु तुलसी' और 'कल्पवृक्ष' कहा जाता है, पश्चिमी राजस्थान की संस्कृति और आजीविका का प्रतीक है, खासकर बाड़मेर और जैसलमेर में.
  • ऐतिहासिक रूप से, खेजड़ी ने अकाल के दौरान लोगों को भोजन प्रदान किया; इसकी छाल का उपयोग रोटी बनाने के लिए किया जाता था और इसकी 'सांगरी' अब एक लोकप्रिय व्यंजन है.
  • यह पेड़ औषधीय, धार्मिक और सांस्कृतिक रूप से महत्वपूर्ण है, ग्रामीण क्षेत्रों में अनुष्ठानों और समारोहों के लिए शुभ माना जाता है.
  • पारिस्थितिक संतुलन बनाए रखने, मिट्टी के कटाव को रोकने और भूजल संरक्षण में इसकी महत्वपूर्ण भूमिका के बावजूद, खेजड़ी कटाई और विकास से खतरे में है.
  • पर्यावरणविद् खेजड़ी के संरक्षण के लिए विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं, जो थार रेगिस्तान के पारिस्थितिकी तंत्र और स्थानीय समुदायों के लिए महत्वपूर्ण है.

यह क्यों महत्वपूर्ण है?: पश्चिमी राजस्थान का ऐतिहासिक जीवनदाता और सांस्कृतिक प्रतीक खेजड़ी वृक्ष अब खतरे में है और उसे तत्काल संरक्षण की आवश्यकता है.

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