मुर्शिदाबाद की महिलाएं 'बाळापोश' बनाकर बनीं आत्मनिर्भर, हर महीने कमा रहीं हजारों रुपये.

दक्षिण बंगाल
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News18•04-01-2026, 16:22
मुर्शिदाबाद की महिलाएं 'बाळापोश' बनाकर बनीं आत्मनिर्भर, हर महीने कमा रहीं हजारों रुपये.
- •मुर्शिदाबाद के पल्लीश्री गांव की महिलाएं 'बाळापोश' (हल्की सर्दियों की रजाई जैसा वस्त्र) बनाकर हर महीने हजारों रुपये कमा रही हैं और आत्मनिर्भर बन रही हैं.
- •गांव की लगभग 95% महिलाएं इस कुटीर उद्योग में शामिल हैं, जो घर के काम के साथ-साथ यह काम भी संभालती हैं.
- •'बाळापोश' पूरे साल बनाए जाते हैं, सर्दियों में काम का दबाव अधिक होता है, और इन्हें मालदा और बीरभूम जैसे जिलों में भी निर्यात किया जाता है.
- •'बाळापोश' बनाने के लिए दो पुरानी रेशमी साड़ियों को जोड़कर, रेशमी कपास भरकर और कंथा की तरह सिलाई करके तैयार किया जाता है.
- •अनिमा सरकार जैसी महिलाएं प्रति 'बाळापोश' 80 रुपये तक कमाती हैं और अपना उद्यम शुरू करने का सपना देखती हैं, कुछ महिलाएं सात हजार रुपये तक मासिक कमा रही हैं.
यह क्यों महत्वपूर्ण है?: पल्लीश्री की महिलाओं की 'बाळापोश' पहल आत्मनिर्भरता और आर्थिक सशक्तिकरण को बढ़ावा देती है.
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