
इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने फैसला सुनाया कि एक विवाहित पुरुष का एक वयस्क महिला के साथ सहमति से लिव-इन रिलेशनशिप में रहना अपराध नहीं है।
एक विधवा अपने पति की मृत्यु के बाद भी अपने ससुर से भरण-पोषण पाने की हकदार है। एक बहू की अपने सास-ससुर का भरण-पोषण करने की कोई कानूनी जिम्मेदारी नहीं है।
नहीं, स्थिर लिव-इन जोड़ों को विवाहित के रूप में गिनने का जनगणना 2027 का निर्णय विवाह वैधता कानूनों को नहीं बदलता है।