बलिया की खिचड़ी परंपरा: मायके की मिठास और रिश्तों का प्यार, कमला दादी की भावुक कहानी

बलिया
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News18•14-01-2026, 21:12
बलिया की खिचड़ी परंपरा: मायके की मिठास और रिश्तों का प्यार, कमला दादी की भावुक कहानी
- •बलिया के भृगु आश्रम की 80 वर्षीय कमला चतुर्वेदी मकर संक्रांति की 'खिचड़ी' परंपरा से अपने भावनात्मक जुड़ाव को साझा करती हैं.
- •इस परंपरा के तहत बेटियों को मायके से खिचड़ी, मिठाइयाँ और अन्य सामान मिलता है, जो पारिवारिक संबंधों का प्रतीक है.
- •कमला बताती हैं कि मोबाइल फोन के दुर्लभ होने के समय तीज और मकर संक्रांति मायके वालों से मिलने के दुर्लभ अवसर थे.
- •अपने भाइयों और भाभी को खोने के बावजूद, यह परंपरा जारी है, जिसे अब भतीजे राघव मिश्रा और विनायक मिश्रा आगे बढ़ा रहे हैं.
- •बलिया की 'खिचड़ी' परंपरा इस बात पर जोर देती है कि त्योहार दिलों को जोड़ने और रिश्तों को बनाए रखने का एक शक्तिशाली माध्यम हैं.
यह क्यों महत्वपूर्ण है?: बलिया की मकर संक्रांति की 'खिचड़ी' परंपरा पीढ़ियों से पारिवारिक प्रेम और जुड़ाव का सुंदर प्रतीक है.
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