बालाघाट के गांवों में आज भी बैलों से बनता है शुद्ध देसी गुड़, पुरानी परंपरा जीवित.

बालाघाट
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News18•08-01-2026, 18:25
बालाघाट के गांवों में आज भी बैलों से बनता है शुद्ध देसी गुड़, पुरानी परंपरा जीवित.
- •बालाघाट के किरनापुर तहसील के एक दर्जन गांवों में आज भी पारंपरिक बैल-चालित कोल्हू से गन्ने का रस निकालकर गुड़ बनाया जाता है.
- •मुरकुडा सहित अन्य गांवों के किसान अपने कोल्हू का उपयोग कर पीढ़ियों पुरानी शुद्ध, रसायन-मुक्त देसी गुड़ बनाने की प्रथा जारी रखे हुए हैं.
- •इस प्रक्रिया में बैल कोल्हू के चारों ओर घूमकर गन्ने का रस निकालते हैं, जिसे 4-5 घंटे उबालकर प्रति बैच 40 किलोग्राम तक गुड़ तैयार किया जाता है.
- •यह पारंपरिक गुड़ स्थानीय बाजारों और गोंदिया (महाराष्ट्र) व छत्तीसगढ़ के कुछ हिस्सों में 60 से 80 रुपये प्रति किलोग्राम में बेचा जाता है.
- •गुड़ बनाने के काम में पूरा परिवार शामिल होता है, जिससे रोजगार मिलता है; किसानों ने चीनी मिल स्थापित करने की मांग की है.
यह क्यों महत्वपूर्ण है?: बालाघाट के गांव बैलों से गुड़ बनाने की अनूठी, पारंपरिक प्रक्रिया को बनाए हुए हैं, विरासत और आजीविका का संरक्षण.
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