कानपुर का बूढ़ा बरगद: 1857 में 133 क्रांतिकारियों की फांसी का गवाह, कहानी आज भी जिंदा है.

कानपुर
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News18•23-01-2026, 16:34
कानपुर का बूढ़ा बरगद: 1857 में 133 क्रांतिकारियों की फांसी का गवाह, कहानी आज भी जिंदा है.
- •कानपुर, उत्तर प्रदेश का एक पुराना बरगद का पेड़ 1857 के विद्रोह और 133 स्वतंत्रता सेनानियों को अंग्रेजों द्वारा फांसी दिए जाने का मूक गवाह था.
- •आज के नाना राव पार्क में स्थित यह पेड़ ब्रिटिश उत्पीड़न के खिलाफ साहस और प्रतिरोध का प्रतीक बन गया था.
- •नाना साहब, तात्या टोपे और रानी लक्ष्मीबाई जैसे नेताओं ने क्रांति का नेतृत्व किया, जिसकी गूँज बिठूर से कानपुर तक पहुँची.
- •अंग्रेजों ने डर पैदा करने के लिए पेड़ से सार्वजनिक फांसी का इस्तेमाल किया, लेकिन इसने भारतीयों के बीच क्रांतिकारी भावना को और बढ़ाया.
- •हालांकि मूल पेड़ नष्ट हो गया, उस स्थान पर एक शहीद स्मारक खड़ा है, जो बलिदान और देशभक्ति की विरासत को संरक्षित करता है.
यह क्यों महत्वपूर्ण है?: कानपुर का ऐतिहासिक बरगद का पेड़, जहाँ 133 क्रांतिकारियों को फाँसी दी गई थी, भारत के 1857 के स्वतंत्रता संग्राम का एक शक्तिशाली प्रतीक बना हुआ है.
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